यूनानी पद्धति से संभव होगा ल्यूकोडर्मा का इलाज Reviewed by Momizat on . हैदराबाद. लगभग लाइलाज माने जाने वाले रोग 'ल्यूकोडर्मा' सफेद दाग का अब यूनानी चिकित्सा पद्धति से इलाज संभव हो सकेगा. हैदराबाद स्थित सेन्ट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट फ हैदराबाद. लगभग लाइलाज माने जाने वाले रोग 'ल्यूकोडर्मा' सफेद दाग का अब यूनानी चिकित्सा पद्धति से इलाज संभव हो सकेगा. हैदराबाद स्थित सेन्ट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट फ Rating: 0
You Are Here: Home » Systems of Medicine » Ayurveda & Siddha » यूनानी पद्धति से संभव होगा ल्यूकोडर्मा का इलाज

यूनानी पद्धति से संभव होगा ल्यूकोडर्मा का इलाज

यूनानी पद्धति से संभव होगा ल्यूकोडर्मा का इलाज

हैदराबाद. लगभग लाइलाज माने जाने वाले रोग ‘ल्यूकोडर्मा’ सफेद दाग का अब यूनानी चिकित्सा पद्धति से इलाज संभव हो सकेगा. हैदराबाद स्थित सेन्ट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट फार यूनानी मेडिसिन सफेद दाग के लिए दवा खोजने के बेहद करीब हैं.

देश की करीब तीन प्रतिशत आबादी सफेद दाग (वाइटीलीगो) से पीड़ित हैं. भारत जैसे विकासशील देशों में अभी इस रोग को संशय की नजर से देखा जाता है और इसके प्रति संकीर्ण मानसिकता है. केन्द्र के निदेशक डॉ. एमए वहीद ने बताया कि सफेद दाग के इलाज के लिए जो शोध चल रहे हैं उनके प्रारंभिक निष्कर्ष काफी उत्साहवर्द्धक हैं.

इस शोध के अंतर्गत मरीजों को यूनानी और हर्बल दवाओं का मिश्रण दिया जा रहा है और ये दवाइयां मरीजों पर काफी असरदार दिखाई दे रही हैं. डॉ. वहीद ने बताया कि यूनानी चिकित्सा पद्धति से मलेरिया, हेपेटाइटिस बी और त्वचा संबंधी कई बीमारियों का उपचार संभव है. यूनानी चिकित्सा पद्धति दरअसल यूनान से भारत पहुंची और इसके फायदे देखते हुए यहां के चिकित्सकों ने उसे अपना तो लिया लेकिन अभी यह ज्यादा लोकप्रिय नहीं हुई है.

डॉ. वहीद कहते हैं कि यूनानी चिकित्सा के फायदे देखते हुए उसके प्रचार-प्रसार के लिए दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका और मलेशिया मे भी दवाखाने खोले गए हैं. यह दवा सेलिब्रल पल्सी जैसे रोग के उपचार में काफी कारगर है और एड्स के मरीजों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने में भी काफी असरकारी साबित हो रही है. यूनान से आई इस चिकित्सा पद्धति के मुरीद बड़े-बड़े राजा-महाराजा और नवाब भी थे.

अंग्रेजों के वक्त में दिल्ली के शरीफी खानदान, लखनऊ के अजीजी परिवार और हैदराबाद के निजाम ने यूनानी चिकित्सा को संरक्षण दिया था. डॉ. वहीद ने दावा किया कि यह प्राचीन चिकित्सा आजकल काफी लोकप्रिय है और अफगानिस्तान, चीन, कनाडा, डेनमार्क, जर्मनी, फिनलैंड सहित करीब 20 देशों में स्थानीय नामों से इसकी शिक्षा दी जा रही है. चिकित्सा के साथ-साथ शोध भी किए जा रहे हैं.

About The Author

Number of Entries : 120

Leave a Comment

Copyright © 2014herbal360. All rights reserved.

Scroll to top