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त्वचा निखार के कुदरती नुस्खे

त्वचा निखार के कुदरती नुस्खे
महंगे क्रीम व लोशन को छोडि़ए, क्योंकि अब आप अपनी रसोई में मिलने वाली चीजों के उपयोग से ही सुंदर दिख सकती हैं। हरेक प्राकृतिक अवयव में कुछ खास पोषक तत्व होते हैं, जो त्वचा को अपनी अच्छाइयां देते हैं। बता रही हैं स्किन केयर विशेषज्ञ डाॅ. अपर्णा सांथनम
त्वचा के लिए प्राकृतिक अवयवों का उपयोग सबसे किफायती और विश्वसनीय तरीकों में एक है। इसका उपयोग त्वचा की सुरक्षित देखभाल के लिए किया जाता है। आज की आधुनिक दुनिया में प्रदूषण, धूप, क्लोरिन वाले स्विमिंग पूल आदि जैसी कई बाहरी परेशानियां हैं, जो त्वचा की नमी को कम करते हैं। पूरे शरीर की त्वचा को नियमित रूप से नमी प्रदान करने की जरूरत है। त्वचा पर जब इतना दबाव है, तो जब कभी संभव हो प्राकृतिक माॅइस्चराइजर का सहारा लेना फायदेमंद साबित होता है। ये त्वचा को बेहद प्रभावी ढंग से नमी प्रदान करते हैं। ये आपको खिली-खिली त्वचा पाने का मौका देते हैं।

शहद
शहद बेहद प्रभावी प्राकृतिक अवयव है और त्वचा के लिए सर्वश्रेष्ठ माॅइस्चराइजर में से एक। यह आवश्यक विटामिन, खनिज और एमिनो एसिड से भरपूर है। इसे अलग-अलग फलों के साथ मिलाया जा सकता है, ताकि त्वचा को भरपूर पोषण दिया जा सके। स्ट्राॅबेरी इलागिका एसिड का अच्छा स्रोत है। यह अल्फा हाइड्राॅक्सी एसिड में से एक है और मृत त्वचा को निकालने में उपयोगी है। इसे क्रीम और शहद के साथ मिलाकर आप चेहरे के लिए एक अच्छा Úूट पैक बना सकती हैं। मधु, नीबू का रस और दही के पेस्ट का उपयोग त्वचा को साफ करने वाले पैक के रूप में किया जा सकता है। यह बहुत आसान तरीके से बैक्टीरिया को दूर करता है। इसके अलावा शहद को गेहूं का आटा, जई का आटा या बादाम के पेस्ट में मिलाकर इसका उपयोग मृत त्वचा को निकालने के लिए किया जा सकता है। तौलिये को गर्म पानी में डुबोकर उससे चेहरा साफ करें। इससे त्वचा में रक्त प्रवाह बेहतर होता है और चेहरे की चमक निखरती है।

नारियल
नारियल भी त्वचा को भरपूर पोषण देता है। यह त्वचा को अनूठे ढंग से नमी देता है। इससे त्वचा की खूबसूरती व स्वास्थ्य बेहतर होता है। इसमें नमी को त्वचा के अंदर लाॅक करने की अनूठी व्यवस्था है, जिससे सतह पर इसका असर नहीं दिखाई देता है। नारियल का प्रभाव त्वचा पर लंबे समय तक रहता है। इसमें फैटी एसिड की मात्रा काफी कम होती है और इसलिए यह यह त्वचा के अंदर अच्छी तरह पहुंच जाता है। नारियल की दूसरी अनूठी खासियत है कि यह त्वचा के प्राकृतिक लिपिड के जैसा ही है। यह त्वचा की कोशिकाओं को मजबूत करता है और यह सुनिश्चित करता है कि त्वचा की रक्षा करने वाले अवयव दुरुस्त रहें। इस तरह यह त्वचा को नए सिरे से दुरुस्त करने का काम करता है। नमी की प्राकृतिक क्षमताओं के साथ मिलकर यह एक आकर्षक स्किन केयर प्रोडक्ट का काम करता है। इसका उपयोग घाव, फोड़े, वायरल संक्रमण, ऐबसेस आदि के उपचार के लिए भी किया जा सकता है। इसकी सबसे अनूठी खासियत यह है कि यह मीडियम चेन फैट्टी एसिड (लाॅरिक एसिड) से समृद्ध है। इससे यह एक सक्षम एंटी इनफ्लेमेट्री और एंटी आॅक्सीडेंट अवयव बनता है।
इसे शामिल करें आहार में त्वचा में लगाने के साथ-साथ त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने के लिए निम्न चीजों को आहार का हिस्सा बनाएंः

स्प्राउट
अंकुरित अनाज प्रोटीन के अच्छे स्नोत हैं, जो त्वचा और बालों को मजबूत करते हैं। मूंग, चना आदि को रात भर पानी में भिगोने के बाद उसे बेहतर त्वचा के लिए खाएं।
फ्लैक्स बीज या तीसी ओमेगा 3 फैटी एसिड का एक प्राकृतिक और शानदार स्रोत है। यह त्वचा को जवां और खूबसूरत बनाए रखता है।
युवा रखने वाले खाद्य पदार्थ

बढ़ती उम्र तन और मन दोनों पर अपना असर डालती है। ताउम्र युवा रहना मात्र झुर्रियों से बच कर रहना नहीं है। दिल और दिमाग का स्वस्थ होना भी जरूरी है। स्वास्थ्यवर्धक खान-पान इसमें आपकी मदद कर सकता है।

ग्रीन टी
ग्रीन टी का सेवन तनाव कम करने में विशेषतौर पर असरकारी है। इससे मांसपेशियों को तुरंत सुकून मिलता है। प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का मिश्रण होने के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है तथा जोड़ों में सूजन बढ़ाने वाले हार्मोन का स्नव भी नियंत्रित रहता है। कई तरह के श्वसन व पाचन संबंधी रोग भी दूर रहते हैं।

सूखे मेवे
सूखे मेवे दिल और त्वचा दोनों के लिए लाभकारी हैं। इनमें मोनोसेचुरेटेड वसा होती है, जिससे हृदय संबंधी रोगों से दूर रहने में मदद मिलती है। इनमें प्रोटीन, विटामिन ई व एंटीआॅक्सीडेंट्स भी भरपूर मात्रा में होते हैं। बादाम में विटामिन ई की अधिकता त्वचा को चमकदार बनाती है, वहीं अखरोट का सेवन दिल व जोड़ों को मजबूत बनाता है। पिस्ते से शरीर को कम कैलोरी में पर्याप्त ऊर्जा मिलती है। सूखे मेवे का सेवन शरीर में मौजूद Úी रेडिकल को क्षतिग्रस्त होने से रोकता है।

जई व दलिया
जई व दलिया को बीमार लोगों का भोजन माना जाता है। यदि आप भी ऐसा ही मानते हैं तो अपनी धारणा बदल लें। दलिया एंटीआॅक्सीडेंट्स का अच्छा स्नोत है। इसमें विटामिन ई, फाइबर, मैग्नीशियम आदि तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं। फाइबर की अधिकता पाचन-वर्धक होती है। ग्लूकोज का नियंत्रित स्नव शरीर को संतुष्टि देता है, जिससे लंबे समय तक भूख नहीं लगती और कोलेस्ट्राॅल का स्तर नियंत्रित रहता है।

सोया
सोया प्रोटीन और फायदा पहुंचाने वाले कोलेस्ट्राॅल का अच्छा स्रोत है, जिसे आप कई रूप में खा सकते हैं। इसका नियमित सेवन कोलेस्ट्राॅल कम रखने में मदद करता है। सोया का सेवन हड्डियों को मजबूत बनाने के साथ रक्तचाप नियंत्रित रखता है। इसमें मौजूद एंटीआॅक्सीडेंट हृदयरोगों व हड्डियों के लिए लाभकारी है।

टमाटर
टमाटर सब्जी नहीं, एक फल है, जो शरीर के लिए लाभप्रद है। टमाटर में पोटैशियम अच्छी मात्रा में होता है, जिससे शरीर में कैल्शियम ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है। विटामिन ए त्वचा को बूढ़ा होने से रोकता है। पके हुए टमाटर से मिलने वाला लाइकोपिन कई तरह के कैंसर को दूर रखने में सहायक है।

 

 

पेट के लिए वरदान है त्रिफला

आंवला, बहेड़ा और हरड़ से तैयार त्रिफला अपने खास गुणों के कारण जाना जाता है। त्रिफला को पाउडर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। जड़ी-बूटी के गुणों वाले त्रिफला में पोषण और बड़ी मात्रा में विटामिन सी मौजूद रहता है। इसके अलावा औषधीय गुणों से युक्त त्रिफला के सेवन से कई तरह की तकलीफें दूर हो जाती हैं।
स अध्ययन में यह बात सामने आई है कि त्रिफला रक्त संचार को ठीक रखने के साथ ही कोलेस्ट्रोल को कम करता है।
स यह उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद करता है और पाचन सुधारता है।
स त्रिफला में एंटीआक्सिडेंट के गुण पाए जाते हैं। इसमें एलर्जी और एचआईवी विरोधी गुण भी पाए जाते हैं।
स यह एनीमिया से जुड़ी तकलीफ, थकान और पाचन में होने वाली कठिनाई को दूर करता है।
स त्रिफला निमोनिया, तपेदिक और एड्स जैसे रोगों में भी लाभदायी होता है।
स आंखों से जुड़ी समस्याओं में भी त्रिफला कारगर साबित होता है। एक कटोरी पानी में एक चम्मच त्रिफला को दो घंटे तक छोड़ दें। उसके बाद उसे कपड़े से छान कर पानी से आंखों को धो लें। यह पानी आंखों के लिए फायदेमंद होता है।
स त्रिफला के काढ़े से घाव को धोने से घाव जल्दी भर जाता है।
स इसके सेवन से कब्ज की शिकायत दूर होती है। इसके लिए त्रिफला को रात में गरम पानी के साथ लें।
स असमय बाल सफेद होने की समस्या से मुक्ति मिलती है।

पेट के अलावा भी है त्रिफला का लाभ
कमजोरी के कारण शरीर बीमारियों का शिकार हो जाता है। लेकिन यदि हम थोड़ी सी सावधानी बरतकर और आयुर्वेद को अपनाए तो अपने स्वास्थ्य की सही तरह से देखभाल कर ही पाएंगे। साथ ही शरीर का कायाकल्प भी करने में आसानी होगी। त्रिफला ऐसी ही आयुर्वेदिक औषधी है जो शरीर का कायाकल्प कर सकती है। त्रिफला के सेवन से बहुत फायदे हैं। स्वस्थ रहने के लिए त्रिफला चूर्ण महत्वपूर्ण है। त्रिफला सिर्फ कब्ज दूर करने ही नहीं बल्कि कमजोर शरीर को एनर्जी देने में भी प्रयोग हो सकता है।

विधि
सूखा देसी आंवला, बड़ी हर्रे व बहेड़ा लेकर गुठली निकाल दें। तीनों समभाग मिलाकर महीन पीस लें। कपड़े में छान कर कांच की शीशी में भरकर रखें।
स त्रिफला के नियमित सेवन से कमजोरी दूर होती है।
स त्रिफला के नियमित सेवन से लंबे समय तक रोगों से दूर रहा जा सकता है।
स त्रिफला और इसका चूर्ण तीनों दोषों यानी वात,पित्त व कफ को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
स बालों के टूटने और समय से पूर्व सफेद होने से भी त्रिफला के सेवन से बचा जा सकता है।
स गाय का घी व शहद के मिश्रण (घी अधिक व शहद कम) के साथ त्रिफला चूर्ण का सेवन आंखों के लिए वरदानस्वरूप है। संयम के साथ इसका नियमित प्रयोग करने से आंखों के सारे रोग दूर हो जाते हैं। बुढ़ापे तक चश्मा नहीं लगेगा।
स त्रिफला के काढ़े से घाव धोने से एलोपैथिक एंटिसेप्टिक की आवश्यकता नहीं रहती। घाव जल्दी भर जाता है।
स त्रिफला के गुनगुने काढ़े में शहद मिलाकर पीने से मोटापा कम होता है।
स रात को गुनगुने पानी के साथ त्रिफला लेने से कब्जियत नहीं रहती।
एलोवेरा है प्राड्डतिक माॅइश्चराइजर

कई तरह के पौधों के अंशों को आज कई चीजों में प्रयोग किया जाता है लेकिन इनमें से एलोवेरा को सबसे ज्यादा बहुउपयोगी माना जाता है। इसका प्रयोग 3,000 से ज्यादा वर्षों से किया जा रहा है। हालांकि इसे लिली फैमिली का सदस्य माना जाता है, लेकिन यह देखने में कैक्टस जैसा ज्यादा लगता है। यह कैक्टस के पौधे के समान मांसल और गूदेदार होता है और इसमें जूस जैसा गाढ़ा जेल पाया जाता है। आमतौर पर यह बगीचों और घरों में आसानी से मिल जाता है। सच तो यह है कि यह बहुत ही आसानी से गमलों में उग जाता है। इसका हिंदी नाम ग्वारपाठा है जबकि घकिंवर या घृतकुमारी इसका संस्कृत नाम है। प्राचीन काल से एलोवेरा को इसकी हीलिंग प्राॅपर्टी के कारण जाना जाता है। इसका प्रयोग कटे स्थान या घाव को भरने के लिए किया जाता था क्योंकि यह क्षतिग्रस्त टिशू के फाॅरमेशन में सहायता करता है। यह शक्तिशाली प्राकृतिक माॅइश्चराइजर भी है। यह डेड स्किन सेल्स को मुलायम करता है और त्वचा को नर्म और चमकदार रखते हुए, उन्हें निकालने में भी मदद करता है।
वास्तव में, यह त्वचा की माॅइश्चर ग्रहण करने की क्षमता को बढ़ाते हुए त्वचा के नाॅर्मल फंक्शन में सहायता करता है। एलोवेरा में एंटी-आॅक्सिडेंट प्राॅपर्टीज पाई जाती है। यह सेल रिन्यूअल प्रोसेस को भी बढ़ाता है। काॅस्मेटिक्स प्रोडक्ट्स में स्टेब्लाइज्ड (स्थायीकृत) एलोवेरा जेल या जूस का प्रयोग किया जाता है। अगर आपने एलोवेरा के पौधे को घर में लगाया है, तो आप इसके जेल या जूस को डायरेक्ट स्किन पर अप्लाई कर सकती हैं। पौधे से लिया गया जेल पत्ते का गूदा होगा, जो पत्ते के अंदरूनी भाग में पाया जाता है। एलो का जूस पत्ती की बाहरी त्वचा के नीचे पाया जाता है। हालांकि जब आप घर पर ही इसे सीधे त्वचा पर लगाएंगी तो उससे पहले इसके पत्तों को अच्छी तरह धो लें और इसके गुणों का पूरा लाभ लें। एलोवेरा जेल या जूस को आप चेहरे पर अप्लाई कर सकती हैं, फिर 20 मिनट बाद इसे सादे पानी से धो दें। यह आपकी त्वचा को मुलायम बनाते हुए माॅइश्चराइज करेगा। सच्चाई तो यह है कि अगर आप इसे नियमित रूप से प्रयोग करें तो यह आपकी त्वचा को जवां बनाये रखने वाले गुणों को कायम कर सकता है। सर्दी और गर्मी, दोनों महीनों में एलोवेरा बेहतर होता है। सर्दियों में यह ड्राईनेस से बचाता और त्वचा के साॅफ्ट टेक्सचर को मेंटेन रखने में मदद करता है।
गर्मियों में यह त्वचा को कोमल रखता है, खासकर सन एक्सपोजर के बाद। साथ ही, यह त्वचा को आॅयली बनाए बिना ही माॅइश्चराइज करता है। एलोवेरा को फेस मास्क में भी मिलाया जा सकता है। एक टेबलस्पून बेसन, एक टीस्पून संतरे के छिलके का पाउडर और एक चम्मच दही के साथ एक टेबलस्पून एलोवेरा जेल लें। सभी को अच्छी तरह मिला कर त्वचा पर लगाएं। फिर 30 मिनट बाद धो दें। एलोवेरा को आप हेयर पैक के रूप में भी प्रयोग कर सकती हैं। इसके जेल को बालों पर लगाएं और फिर 20 मिनट बाद सादे पानी से धो दें। यह ड्राई, रफ और डैमेज बालों के टेक्सचर को इम्प्रूव करके बालों को मुलायम और कांतिवान बनाता है। इसे आप हेयर पैक के साथ भी प्रयोग कर सकती हैं। क्लिंजिंग पैक के लिए बेसन, दही और एक टेबलस्पून एलोवेरा जेल लें। इन सभी को अच्छी तरह मिलाकर बालों पर लगाएं। फिर एक घंटे बाद बाल धो लें। बहुत ज्यादा ड्राई, रफ और कमजोर बालों के लिए एक अंडा, एक टेबलस्पून कास्टर आॅयल, नींबू का रस और एक टेबलस्पून एलोवेरा जेल या जूस मिलाएं। इस मिश्रण को बालों पर लगाकर प्लास्टिक शावर कैप पहन लें। आधे घंटे बाद बाल धो लें।
कैसे पाएं धूम्रपान से छुटकारा

धूम्रपान छोड़ने की दिशा में सबसे पहला कदम खुद से धूम्रपान छोड़ने का निर्णय लेना है। इससे मानसिक मजबूती आती है और आप इस लत से मजबूती से बाहर निकल पाते हैं। निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी और अन्य दवाइयों से भी इस समस्या के कई लक्षण दूर हो सकते हैं। धूम्रपान छोड़ने की मुख्य चुनौती इसलिए भी है कि बड़ी संख्या में लोगों में यह आदत उनके काम-काज व दैनिक गतिविधियों से जुड़ी होती है, मसलन शौच जाने से पहले, सुबह जगने के तुरंत बाद, पढ़ने-लिखने का काम शुरू करने से पहले आदि। ऐसे में खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाना जरूरी होता है।
निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी में प्रत्येक खुराक के साथ इसकी मात्र कम की जाती है। तम्बाकू के विकल्प जैसे कि पैच, निकोटिन गम, निकोटिन एयरोसाॅल और इनहेलर धूम्रपान छोड़ने में काफी मददगार हैं। इस उपचार में आपके शरीर को निकोटिन तो मिलता है, पर उसके विषैले तत्व नहीं। इसी तरह चीनी चिकित्सा पद्धति एक्यूपंचर से भी निकोटिन की लत दूर की जा सकती है।

 

स्वास्थ्य सलाह

समस्या 1- मेरी आयु 37 साल है मैं यहाँ एक विद्यालय में प्रधानाचार्य हूँ। पिछले दो साल से मैं बार-बार बुखार आ जाने एवं सर्दी-जुकाम लग जाने से परेशान हूँ। आश्चर्य की बात तो यह है कि गर्मी के महीने जून और तपती गर्मी में भी मुझे जुकाम और बुखार हो जाता है। मेरे मित्र और परिवार के लोग भी मजाक बनाते हैं कि यह आपको कैसी बीमारी है। मैं चण्डीगढ़ मेडिकल काॅलेज में अपनी ख़ून-मल-मूत्र की जाँच भी करवाया हूँ पर डाक्टरों का कहना है कोई बड़ी बीमारी नहीं है। कमजोरी है दवा लेने पर यह चार-पाँच दिनों में ठीक हो जाता है पुनः पच्चीस दिन, महीना भर बाद आ जाता है मैं दुखी हूँ अपने मित्र के कहने पर पत्र लिख रहा हूँ। क्योंकि उसकी पेट की बीमारी आपके इलाज से पूरी तरह मिट गयी। मुझे भी हर्बल चिकित्सा बतायें जिससे मैं पूर्ण स्वस्थ जीवन पा सकूँ।
— मनोहर चैधरी, भिवानी, हरियाणा
समाधान- आपकी समस्या कहने-सुनने में सामान्य लगती है परन्तु निदान की दृष्टिकोण से सामान्य न होकर अत्यन्त जटिल है क्योंकि आप और आधुनिक चिकित्सा जिसे कमजोरी कह रहा है आयुर्वेद में उसे कान्तिक्षीणता अथवा प्रभाहीन होना बताया गया है। जिसका तात्पर्य है बल क्षीणता सप्त धातुओं का उपादेय बल होता है जो शरीर की रोगों से रक्षा करता है तथा शरीर के लिये क्रियाकारी ऊर्जा स्त्रोत बनाता है जब वह क्षीण हो जाता है तो शरीर न तो रोगों से अपनी रक्षा कर पाता है न ही सुचारू रूप से अपने जीवन के आवश्यक कर्मो को पूरा कर पाता हैं अतः सर्व प्रथम आप अपना दैनिक आहार धातु पौष्टिक बनायें तथा पाचकाग्नि समृद्ध करें साथ में औषधि लें स्वास्थ्य लाभ होगा। इसके लिये खाने में दूध-फल, दूध से बनने वाली चीज़ें तथा मटर-पनीर तथा सुखे फलों की मात्रा बढ़ायें, खटाई, मिर्च-मसाला, तली चीज़ें कम खायें पुनः औषधि के रूप में सुर्दशन धन वटी 2 गोली सुबह शाम ज्वरान्तक वटी 1 गोली सुबह शाम खाने के बाद समोष्ण जल से लें। पंचामृत पर्पटी 5 मि.ग्रा. सितोपलादि चूर्ण 1 चम्मच तीन चम्मच शहद से दिन में तीन बार खायें। दूध में तुलसी पत्र, काली मिर्च, लवंग, इलायची, अदरक डालकर काढ़ा बना लें। सुबह-शाम ख़ाली पेट पियों करें। रात में सोते समय 1 गिलास दूध में दो चम्मच अश्वगन्धा चूर्ण एक चम्मच चीनी मिलाकर अवश्य लें। इस प्रकार कम से कम इस क्रम को 25 से 40 दिन चलायें पूर्ण लाभ होगा। व्याधि से पूर्ण मुक्ति पायेंगे।
समस्या 2- मेरी आयु 28 साल है मैं इलेक्ट्रानिक इन्जिनियर हूँ परन्तु स्वास्थ्य को लेकर परेशान चल रहा हूँ। पिछले दो साल में अभी तीसरी बार मुझे पीलिया रोग से प्रभावित होना पड़ा था। मैं शरीर से कमज़ोर हूँ। मुझे खुल कर भूख भी नहीं लगती। इस लिये खाना पूरा नहीं खा पाता हूँं। यदि भूख से थोड़ा भी अधिक खा लेता हूँ तो पतले दस्त लग जाते हैं। पेट में गैस बनने लगती है, पेट में दर्द भी होने लगता है। मुझे मीठी चीज़ें खाने में कम पसन्द आती हैं मैं मसालेदार, नमकीन, खट्टी स्वादिष्ट तथा तली हुई चीज़ों को प्राथमिक्ता देता हूँ। सुबह मेरा पेट भी पूरी तरह से साफ नहीं हो पाता है। पिछले दो साल से आधुनिक दवायें खा रहा हूँ। सभी तरह मल, मूत्र, रक्त परीक्षण भी करवा चुका हूँ। डाक्टरों का कहना है लीवर की कमजोरी है। धीरे-धीरे दूर होगी परन्तु मैं एक अपने मित्र की सलाह से आपको पत्र लिख रहा हूँ उसका कहना है पीलिया में हर्बल दवायें विशेष लाभप्रद होती हैं। अतः मुझे हर्बल औषधियों से पूर्ण स्वस्थ होने की सलाह दें।
भीष्म शर्मा, ध्नबाद
समाधान- आपके मित्र ने आपको सही सलाह दी है क्योंकि नाड़ी, हृदय यकृत, उदर और वृक्क एवं अस्थि शोथ, शूल में हर्बल दवायें अत्यन्त लाभप्रद हैं तथा रोग को समूल नष्ट करती हैं। यदि उनका सम्यक् प्रयोग समयानुकूल किया जाये तो शरीर सदैव स्वस्थ रहता है जब मानव तली खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ा देता है मिर्च मसाला खटाई को भी अति मात्रा में लेने लगता है। मिलावटी आहार का प्रयोग भी पीलिया रोग उत्पन्न करता है। अतः सर्व प्रथम आप इन चीजों से दूर रहें और सदैव सन्तुलित आहार समयानुसार ग्रहण किया करें। नशे का सेवन शराब इत्यादि का निरन्तर प्रयोग पीलिया उत्पन्न कर सकता है। अतः इससे भी बचना अनिवार्य है। खाने में मूली, हरी सब्जी तथा फलों का प्रयोग बढ़ायें तथा अण्डा, माँस आदि भी कम खायें। औषधि के रूप में यकृतोदर वटी 2 गोली आरोग्य वर्द्धिनी 2 गोली समोष्ण जल से लें सूत शेखर रस 1 गोली शहद से खायें साथ मे ंखाने के बाद कुमारी यासव 20 मि.ली. समान मात्रा जल मिलाकर सुबह-शाम लिया करें। पूर्ण स्वस्थ हो जायेंगे पर औषधि कम से कम 25 दिन अवश्य लें।

समस्या 3- मेरी आयु 28 साल है। मैं एक कम्पनी में कैशियर के पद पर कार्यरत हूँ। पिछले साल से मुझे हाई ब्लड प्रेशर रहने लगा है। जाँच करने पर 160/104 आता है आधुनिक गोलियाँ खा रहा हूँ पर रोज मुझे दो गोली लेनी पड़ती है हमें उपयुक्त हर्बल चिकित्सा बतायें जिससे स्थाई लाभ मिल सके।
— रोहित गुप्ता, जालंधर, पंजाब
समाधान- यदि पूर्ण परहेज कर आप नियमित चालीस दिनों तक औषधि सेवन करें तो लाभ मिलेगा। सर्वप्रथम आप फैट एवं नमकीन का परहेज करें और कम खायें। हर तरह के नशे जैसे बीड़ी, तम्बाकू, सिगरेट, शराब से दूर रहें। औषधि के रूप में हृदयार्णव रस 1 गोली रस राज रस 1 गोली सुबह शाम समोष्ण जल से लिया करें। साथ में अर्जनारिष्ट 25 मि.ली. समान मात्रा सादा जल मिलाकर पिया करें, तनाव से बचें एवं नींद पूरी लें। शरीर को ढीला रखें।

समस्या 4- मेरी 14 साल की लड़की न तो बढ़ रही है न ही शरीर से ताकतवर हो पा रही है। खाना दूध समय से लेती है फिर भी उसका शारीरिक विकास नहीं हो पा रहा है दवायें खिलाकर परेशान हो गयी हूँ। अतः कोई हर्बल उपचार बतायें।
— निधी अग्रवाल, नोएडा, उ.प्र.
समाधान- आप शंख भस्म 5 मि.ग्रा. लौह भस्म 3 मि.ग्रा., दो चम्मच शहद में मिलाकर दें। 1 गिलास दूध में 2 चम्मच अश्वगन्धा चूर्ण मिलाकर पिलायें। प्रतिदिन 1 सेब 3 केले अवश्य खाने को दें। लोहासव 15 मिली समान मात्रा जल मिलाकर पिलायें। सुबह शाम खेलने को भेजा करें। खाने में दाल हरी सब्जियों का प्रयोग नियमित करायें। पूर्ण ताकत एवं वृद्धि पायेंगी। खटाई मसाला न दें।

 

”पत्थर की तहरीर नहीं है भारतीय चिकित्सा में शिक्षा के न्यूनतम मानक“
-अनिल कुमार (सचिव आयुष)

भारतीय चिकित्सा केन्द्रीय परिषद के तत्वावधान में, नव निर्वाचित अध्यक्ष डाॅ. वेद प्रकाश त्यागी एवं उपाध्यक्ष (यूनानी) डाॅ. राशिद उल्ला के अथक प्रयासों से भारतीय चिकित्सा केन्द्रीय परिषद, आयुष विभाग एवं आयुष महाविद्यालयों का संयुक्त अधिवेशन 7 अगस्त 2012 को फिक्की आॅडिटोरियम, नई दिल्ली में सम्पन्न हुआ।
अधिवेशन को सम्बोधित करते हुए डाॅ. वेद प्रकाश त्यागी ने बताया कि परिषद के अथक प्रयासों से वर्षों से लम्बित स्नातकोत्तर आयुर्वेद शिक्षा विनियम 2012 राजपत्र में प्रकाशन की तारीख में प्रस्तुत कर दिया गया है। इसके साथ ही भारतीय चिकित्सा में शिक्षा के न्यूनतम मानक आवश्यकताएँ विनियम 2012 को भी राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से प्रस्तुत कर दिया गया है।
सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए माननीय श्री अनिल कुमार, सचिव आयुष विभाग भारत सरकार, ने महाविद्यालयों के प्रतिनिधियों को बताया कि ये विनियम प्रयोगात्मक स्तर पर आयुष महाविद्यालयों के शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए बनाया गया तथा यह शिक्षा के न्यूनतम मानक पत्थर की तहरीर नहीं है। महाविद्यालयों एवं प्रिंसिपलों की कठिनाइयों के परिपेक्ष्य में महाविद्यालयों एवं संलग्न हस्पतालों के अनुरोध पर इन्हें बदला भी जा सकता है।
पूरे भारत वर्ष में आयुष महाविद्यालयों के प्रिंसिपलों के अलावा सम्मेलन को डाॅ. प्रसन्ना एस राव एक्जीक्युटिव सदस्य, सी.सी.आई.एम., डाॅ. मनोज नेसरी जाॅइन्ट एडवाईज़र आयुष विभाग, श्री. पी.के.झा डाॅयरेक्टर आयुष विभाग, श्री बाला प्रसाद, जाॅइन्ट सेक्रेटरी आयुष विभाग, डाॅ. स्टेनली जाॅन्स उपाध्यक्ष सिद्धा सी.सी.आई.एम. एवं डाॅ. राशिद उल्ला खान उपाध्यक्ष यूनानी सी.सी.आई.एम. ने भी सम्मेलन को सम्बोधित किया तथा अतिथियों के प्रश्नों के उत्तर दिये।
विस्तृत जानकारी वेबसाईट: ूूूण्ीमतइंस360ण्वतह और ूूूण्ंचंनेउेण्बवउ पर उपलब्ध है।

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